Monday, 18 April 2016

हद कर दी आपने

हद कर दी आपने
स्वास्थ्य महकमा खुद कर रहा जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़-
दिनकर प्रकाश शर्मा की कलम से...
हड़कंप एक्सप्रेस@जबलपुर। आपको अपने स्वास्थ्य की चिन्ता अब खुद को करनी पड़ेगी क्यों कि इन दिनों स्वास्थ्य विभाग कुम्भकरण की नींद सो रहा है । स्वास्थ्य महकमे को जरा भी फिकर जनता की नही है सिर्फ खाना पूर्ति कर रहे हैं,स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। जिले में २०० से ज्यादा झोलाछाप डाॅक्टर सक्रिय हैं, १५ से ज्यादा प्राईवेट अस्पताल बिना डाॅक्टरों के चल रहे हैं।दलालों की मनमर्जी से मरीजों की निलामी हो रही है। जिले के निजी अस्पतालों में न ही डाॅक्टर हैं ना तो प्रशिक्षित स्टाफ । जनहित याचिका में माननीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश के आदेश को भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नहीं मान रहे हैं।
बड़े बड़े बोर्ड लगाकर सर्वसुविधा़ुक्त अस्पताल बिना डाॅक्टरों के चल रहे हैं। ऐसे अस्पताल सिर्फ चन्द पैसे कमाने के लिए मरीजों की जान के साथ खेल रहे हैं। यहां मुर्दों की भी निलामी हो रही है, आए दिन समाचार पत्रों में खबरें आती रहती हैं। जबलपुर में चिकित्सा क्षेत्र की दयनीय स्थिति बनाने  वाले खुद सी.एम.एच.ओ और पूरा स्वास्थ्य महकमा है। सी.एम.एच.ओ को पता भी है कि कहां क्या चल रहा है। दो कमरे में बहुविभागीय अस्पताल का संचालन कैसे किया जा रहा है? आॅपरेशन थिएटर भी तय मानक पर खरे नहीं उतरते फिर भी यहां वर्ष भर में सैकड़ों बड़े बड़े आॅपरेशन कर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
आखिर क्या कारण है कि जबलपुर में सभी उच्चस्तरीय सुविधाएं एवं चिकित्सकों की मौजूदगी के बावजूद भी मरीजों का विश्वास जबलपुर के अस्पतालों से उठता जा रहा है? क्या कारण है कि जबलपुर में जो चिकित्सक या अस्पताल अच्छे काम कर रहे हैं उन्हे भी "लूटेरा-यमराज" जैसे शब्दों से सम्बोधित किया जा रहा है। सिर्फ चन्द 'मरीजमाफियाओं' के कारण पूरे चिकित्सा क्षेत्र को नीचा देखना पड़ता है।
जिले में चिकित्सक विहीन अस्पताल किसके दम पर चल रहे हैं? कहां से और कैसे मरीज आते हैं? यह सभी बातें स्वास्थ्य महकमें को पता होने के बावजूद मरीजमाफियाओं के विरूद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। अस्पतालों की दयनीय स्थिति देखते हुए उनका पंजीयन बरकरार कैसे रखा गया है?
जिले में आई.सी.यू कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ गये हैं। सवाल यह उठता है कि जितने आई.सी.यू विशेषज्ञ जिले में नहीं हैं उतने आई सी यू कहां से बन गए।
ऐसा नही है कि निजी अस्पताल संचालक शासनादेश का पालन नहीं करेंगे बल्कि पालन करवाने वाले अधिकारी खुद उदासीन रवैया अपनाएं रखें तो कहां तक मरीजों की सुरक्षा सम्भव है।
नर्सिंगहोम एक्ट हो या फिर पी सी पी एण्ड डी टी एक्ट , इनकी खुले आम धज्जियां उड़ायी जा रही हैं। हर नुक्कड़ पर पैथोलाॅजी लैब का संचालन किया जा रहा है। जहां न कोई सुविधाएं है न ही पैथोलाॅजिस्ट । सबसे ज्यादा अनियमितताएं सिर्फ स्वास्थ्य विभाग में हैं लेकिन अधिकारियों को यह अनिमितताएं दिखाई नहीं देती।
धन्य है जिले का स्वास्थ्य महकमा । आपके धृतराष्ट्र कार्यशैली को सलाम वाकई "हद कर दी आपने"।

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